बजट में इस घोषणा के बाद शेयर बाज़ार धड़ाम, क्या विदेशी निवेशकों पर भी पड़ेगा असर?

शेयर बाज़ार

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इमेज कैप्शन, एसटीटी की वजह से विदेशी निवेशकों को लेकर भी शंकाएं ज़ाहिर की जा रही हैं

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2025-26 पेश किया. निर्मला सीतारमण का यह लगातार नौवां बजट था.

लेकिन शेयर बाज़ार में इस बजट भाषण की नकारात्मक प्रतिक्रिया आई और वित्त मंत्री के भाषण ख़त्म होते-होते शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट दर्ज की गई. सेंसेक्स ने एक समय क़रीब 2000 अंकों तक का गोता लगा दिया था.

जानकार मान रहे हैं कि शेयर मार्केट में वायदा कारोबार पर सिक्योरिटी ट्रांज़ेक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ाए जाने की घोषणा के कारण ये प्रतिक्रिया आई. अब एसटीटी को लेकर आयकर विभाग की सफ़ाई सामने आई है.

आयकर विभाग ने बयान जारी कर बताया है कि एसटीटी सिर्फ़ ऑप्शंस और फ़्यूचर्स की ट्रेडिंग में बढ़ाया गया है.

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वित्त मंत्री ने बजट में बताया था कि वो फ्यूचर्स में एसटीटी को 0.02 फ़ीसदी से बढ़ाकर 0.05 फ़ीसदी करने का प्रस्ताव कर रही हैं.

इसके बाद शेयर बाज़ारों में भारी बिकवाली देखने को मिली जिसके बाद आयकर विभाग को बयान जारी करना पड़ा.

आयकर विभाग ने एक्स पर लिखा, "फ़्यूचर्स में रेट 0.05 और ऑप्शंस के लिए यह 0.15 है. हमारी जीडीपी 300 लाख करोड़ रुपये की है जबकि ऑप्शंस और फ़्यूचर्स का वॉल्यूम 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा है."

"इस वजह से ऑप्शंस और फ़्यूचर्स में पूरी तरह से काल्पनिक गतिविधि को रोकने के लिए रेट बढ़ाने का औचित्य है."

एसटीटी क्या है?

निर्मला

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इमेज कैप्शन, अभी तक एफ़एंडओ पर एसटीटी 0.02 फ़ीसदी और 0.1 फ़ीसदी था

एसटीटी का पूरा नाम है- "सिक्योरिटीज़ ट्रांज़ैक्शन टैक्स". ये शेयरों की ख़रीद फ़रोख्त पर लगता है.

वित्त मंत्री ने कहा कि फ्यूचर्स एंड ऑप्शन्स में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन को दोगुने से अधिक बढ़ाने का प्रस्ताव है.

अभी तक एफ़एंडओ पर एसटीटी 0.02 फ़ीसदी और 0.1 था, जिसे अब बढ़ाकर 0.05 और 0.15 फ़ीसदी करने का प्रस्ताव है. एसटीटी वास्तव में दूसरे टैक्स के मुकाबले अलग है.

राजस्व बढ़ाने और वित्तीय बाज़ारों में स्थिरता बढ़ाने के लिए शेयरों के लेन-देन पर ये टैक्स लगाया जाता है.

यह पूरी तरह से मूल्य आधारित होता है, यानी जितने अधिक मूल्य के शेयरों की ख़रीद-फरोख़्त करते हैं, उतना ही अधिक एसटीटी लगेगा. फिर चाहे शेयरों के उस सौदे पर व्यक्ति को लाभ हुआ हो या नहीं.

वित्त मंत्री

विदेशी निवेशकों पर क्या असर होगा?

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एसटीटी की घोषणा से मार्केट में आए भूचाल के बाद ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि विदेशी निवेशकों (फ़ॉरेन पोर्टफ़ोलियो इन्वेस्टर्स-एफ़पीआई) पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

ऐसी आशंकाएं जताई जा रही हैं कि विदेशी निवेशक अपनी पूंजी को दूसरे उभरते बाज़ारों की ओर ले जा सकते हैं.

बीते सालों के दौरान ये ट्रेंड कई बार देखा गया है कि भारतीय शेयर बाज़ार में विदेशी निवेशक नेट सेलर बने हुए हैं. सिर्फ़ जनवरी 2026 में एफ़पीआई ने 41 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा की इक्विटी निकाली थी.

एसटीटी का क्या एफ़पीआई पर कोई असर पड़ेगा? इस सवाल पर शेयर मार्केट एक्सपर्ट देवेन चौकसी कहते हैं कि इसका कोई असर विदेशी निवेशकों पर नहीं पड़ेगा.

वो तर्क देते हुए कहते हैं, "एसटीटी इक्विटी पर नहीं बल्कि डेरिवेटिव पर बढ़ा है, इस वजह से इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा. एसटीटी पहले भी पांच बार बढ़ चुका है तब भी इस पर कोई फ़र्क नहीं पड़ा था. इसकी वजह यह भी है कि ट्रेड के ऑवरऑल साइज़ की तुलना में एसटीटी बेहद छोटा है."

जनवरी में बड़ी संख्या में विदेशी निवेश के भारत से बाहर जाने के सवाल पर देवेन चौकसी कहते हैं कि गोल्ड-सिल्वर में जो तेज़ी बनी उसकी वजह से पैसा इक्विटी से निकलकर वहां चला गया था. दूसरी वजह भारत की मुद्रा में गिरावट है, जिसकी वजह से पैसा यहां से निकाला गया.

वहीं अंग्रेज़ी बिज़नेस न्यूज़ वेबसाइट मिंट से मार्केट विश्लेषक आकाश शाह कहते हैं कि बढ़े हुए एसटीटी की वजह से कम समय के लिए निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए यह कम आकर्षक हो जाएगा जबकि लंबी अवधि के लिए निवेश करने के लिए यह बढ़ोतरी कोई बड़ी ��ुकावट नहीं होगी.

वो कहते हैं, "उनके निवेश के फ़ैसले ज़्यादातर कमाई की स्पष्टता, मुद्रा की स्थिरता और नीति की पूर्वानुमानित दिशा पर निर्भर करते हैं."

कार्ड

इनकम टैक्स

केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि नया इनकम टैक्स क़ानून एक अप्रैल, 2026 से लागू होगा.

आयकर रिटर्न (आईटीआर) की फ़ाइलिंग से जुड़ी समयसीमा और नियमों में भी बदलाव किए गए हैं.

आईटीआर-1 और आईटीआर‑2 दाख़िल करने वाले अब 31 जुलाई तक अपना रिटर्न फ़ाइल कर सकेंगे.

हालांकि, इस बार इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव नहीं किए गए हैं.

दरअसल, पिछले साल आई नई टैक्स रिजीम में सालाना 12 लाख रुपये तक की आमदनी पर कोई इनकम टैक्स नहीं है. सैलरी क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन 75 हज़ार रुपये है, इस लिहाज़ से सैलरी क्लास की 12 लाख 75 हज़ार रुपये तक की इनकम टैक्स फ़्री होगी.

ऑरेंज इकोनॉमी

वित्त मंत्री ने कहा, "भारत का एनिमेशन, विज़ुअल इफ़ेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (एवीजीसी) सेक्टर एक ग्रोइंग इंडस्ट्री है, जिसमें 2030 तक 20 लाख पेशेवर लोगों की ज़रूरत होगी."

वित्त मंत्री ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज़, मुंबई को 15 हज़ार सेकेंड्री स्कूलों और 500 कॉलेजों में एवीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने में मदद करने का प्रस्ताव दिया है.

ऑरेंज इकोनॉमी या क्रिएटिव इकोनॉमी, उन सेक्टर्स को कहते हैं जो व्यक्तिगत क्रिएटिविटी, स्किल और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी पर आधारित होते हैं, जिसमें कला, डिज़ाइन, फ़ैशन, फ़िल्म, संगीत और डिजिटल कंटेंट शामिल हैं.

स्वास्थ्य

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इमेज कैप्शन, बजट भाषण के दौरान शेयर बाज़ार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी

वित्त मंत्री ने स्वास्थ्य और दवाओं के क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं. कैंसर और दुर्लभ बीमारियों से जुड़ी कई दवाओं पर शुल्क कम करने का प्रस्ताव दिया.

उन्होंने बजट में अगले 5 वर्षों में बायोफ़ार्मा में 10 हज़ार करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया.

उन्होंने अपने बजट भाषण में तीन अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान बनाने और जामनगर में आयुर्वेद रिसर्च सेंटर बनाने की भी घोषणा की.

वित्त मंत्री ने अपना भाषण शुरू करते हुए कहा कि सरकार का ज़ोर औद्योगिक विकास को बढ़ाना है और पिछले साल 15 अगस्त के बाद से 350 से अधिक आर्थिक सुधार किए गए.

उन्होंने आर्थिक विकास को तेज़ करने के लिए मैन्युफ़ैक्चरिंग, एमएसएमई, इंफ़्रा, सुरक्षा और स्थिरता में मज़बूती पर ज़ोर दिया.

इस बार के बजट में केंद्रीय वित्त मंत्री ने रेयर अर्थ मिनरल्स के लिए विशेष कॉरिडोर और साथ ही सात रेलवे कॉरिडोर बनाने की घोषणाएं कीं.

स्वास्थ्य और दवाओं से लेकर शिक्षा और महिलाओं को लेकर भी कुछ अहम घोषणाएं की गईं, लेकिन एक घोषणा ने शेयर बाज़ारों का मूड बिगाड़ दिया.

रेयर अर्थ

  • ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेयर अर्थ के लिए स्पेशल कॉरिडोर
  • इस कॉरिडोर का नाम होगा रेयर अर्थ मैग्नेट कॉरिडोर
  • इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए 40 हज़ार करोड़ रुपये का प्रस्ताव

मैन्युफ़ैक्चरिंग

  • कंटेनर मैन्युफ़ैक्चरिंग के लिए 10 हज़ार करोड़ रुपये का प्रस्ताव
  • एसएमई सेक्टर के लिए 10 हज़ार करोड़ रुपये का ग्रोथ फ़ंड
  • माइक्रो एंटरप्राइज़ेज़ के लिए 2 हज़ार करोड़ रुपये दिए जाएंगे
  • अगले 5 साल में 100 नए वाटर-वे
  • युवाओं के प्रशिक्षण के लिए कई केंद्र बनाने का भी प्रस्ताव
  • 7 हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाने का प्रस्ताव

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.